एक समाज, दो युवाँ और अलग अलग रास्ते..

- December 05, 2017
उनाकांड के अमानवीय दलित अत्याचार के बाद गुजरात समैत पुरे भारत मै जातिवाद और मनुवाद के खिलाफ लोगों ने जमकर विरोध किया और सामाजिक न्याय के पक्ष मै संवैधानिक अधिकारो को लेकर आंदोलन चलाया।


आज कल गुजरात विधानसभा के चुनाव को लेकर पुरे देश की नजर अनुसुचित जाति के 50 लाख लोगो पर है, क्योंकी गुजरात विधानसभा की 182 में से 102 सीटो पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से अनुसुचित जाति के लोगों का पुरा दबदबा है।


अभी कुछ दिनो से मिडीया पर गुजरात के चुनाव मैं दलित वोट को लेकर बडी बहस चल रही है, जिसमे मिडीया द्वारा हमारे समाज के दो युवाँ कार्यकर्ताओं के मंतव्यो और विचारो को दिखाया जा रहा है। जिसमे एक है जिग्नेश मेवाणी और दुसरे है केवलसिंह राठोड।


मिडीया द्वारा आयोजित यह कार्यक्रमो के माध्यम से गुजरात के दलितो के दिल मे क्या चल रहा है वो जानने की कोशीश की गई है।


तो आईए देखते है ;


यह दो युवाँओ के दिल मै क्या है ?


दोनों किसके रास्ते पर चल रहै है ?


कौनसी राजनैतिक पार्टी को पसंद करते है ?


कौनसे सामाजिक संगठन से जुडे हुए है ?


उनका सामाजिक योगदान क्या रहा है ?


उनके आदर्श कोन है ?


उनका मिशन और विजन क्या है ?





जिग्नेश मेवाणी एक 37 साल के युवा सामाजिक कार्यकर्ता है, एडवोकेट है और उनाकांड के महाआंदोलन के बाद उनका जाहिर जिवन मे जन्म हुवा।

केवलसिंह राठोड एक 27 साल के युवा सामाजिक कार्यकर्ता है, एडवोकेट है और उनाकांड के महाआंदोलन के जनक माने जाते है।





जिग्नेश, अंग्रेजी और कानुन के स्नातक है और उन्होंने पत्रकारीत्व मे डिप्लोमा किया हुआ है।

केवल, कानुन के स्नातक है और कोमर्स और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के अनुस्नातक है।





जिग्नेश, राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के संयोजक है, वह ज्यादातर उत्तर गुजरात मे सक्रिय है।

केवल, सामाजिक एकता और जागृति मिशन के संयोजक है, वह ज्यादातर सौराष्ट्र मे फैला हुआ है।





जिग्नेश वैसे तो नास्तिक है लैकिन उनके जिवन मैं हिंदु धर्म का ज्यादा प्रभाव है।

केवल भी कोई धर्म को नहीं मानते लेकिन उनके जिवन मैं बौद्व धम्म का ज्यादा प्रभाव है।





जिग्नेश पहले आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश के प्रवकत्ता रह चुके है और पत्रकार के तौर पर काम करते थे।

केवल किसी भी राजनैतिक पार्टी से जुडे हुए नहीं है और पहले उनका छोटा सा कंस्ट्रकशन कंपनी था।





जिग्नेश के कार्यशैली मै कार्ल मार्कस, लेनिन, भगतसिंह और आंबेडकर के विचारो का प्रभाव देखने को मिलता है।

केवल के जिवन मै बुद्ध, कबीर, महात्मा फुले और आंबेडकर के विचारो का प्रभाव देखने को मिलता है।





जिग्नेश के जिवन मै जन संधर्ष मंच, जन विकास और नवसर्जन जैसे गैरसरकारी संस्थानो का प्रभाव रहा है।

केवल के जिवन मै सत्य शोधक समाज, बामसेफ और समता सैनिक दल जैसे सामाजिक संगठनो का प्रभाव रहा है।





जिग्नेश की राजकीय पसंद कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी है।

केवल की राजकीय पसंद बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और कम्युनिस्ट पार्टी है।





जिग्नेश को राहुल गांधी और केजरीवाल का राजनैतिक सहयोग है।

केवल को मायावती और लालु यादव का राजनैतिक समर्थन है।





जिग्नेश ने अब तक कई आंदोलनो मै नेतृत्व किया है, जैसे उनाकांड के बाद दलित जागृति, गांधीनगर मै कोन्ट्राक्ट प्रथा के विरोध मे प्रदर्शन, अहमदाबाद के सफाई कामदारो की हडताल, फर्जी ऐन्कांउन्टर के विरोध मै प्रदर्शन, दंगे के पिडीतो को मदद और धोलका के दलितो की जमीनो को लेकर लडाई लडी है।

केवल भी कई आंदोलनो के नायक रहै है, जैसे उनाकांड का आंदोलन, मोठा बौद्धविहार के गैरकानुनी डिमोलिशन पर प्रदर्शन व विरोध, भुज और राजकोट के सफाई कामदारो की हडताल, कच्छ में कोन्ट्रेकट प्रथा के विरोध मे कर्मचारीयों का आंदोलन, विध्यार्थी अधिकार आंदोलन, उना के दलित किसानो की जमीन का आंदोलन और अस्पृश्यता के संबंध मे संयुक्त राष्ट्र संध व आंतरराष्ट्रीय कोर्ट मै भारत सरकार के खिलाफ शिकायत समेत कई लडाई लडी है।





जिग्नेश ने देश के अन्य प्रदेश जैसे केरल, महाराष्ट्र, दिल्ही, बिहार, कर्नाटक समैत कई राज्यो में जाकर गुजरात के दलितो की स्थिति को देश के सामने रखा।

केवल ने भी केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ही समैत कई प्रदेशो मै जाकर वंचित समुदायो पर हो रहै अन्याय और अत्याचार के विरोध मै आवाज उठाई है।





जिग्नेश को अहमदाबाद हेडकर्वाटर का फायदा मिला और मिडीया मै अपने विचार रखने का पुरा मौका मिला, जिनकी वजह से हम उन्हैं ज्यादा जानते है।

केवल को उना जैसे पिछडे इलाके मे रहने की वजह से मिडीया मै अपनी बात रखने का ज्यादा मौका नहीं मिला, जिनकी वजह से हम उन्हैं कम जानते है।





जिग्नेश पार्टी पोलीटीक्स मै विश्वास रखते है, वे सत्ता परीवर्तन को महत्वपुर्ण मानते है, उनका मानना है की राजनैतिक परीवर्तन से सारी समस्याओं का समाधान संभव है।


केवल जन आंदोलन मै विश्वास रखते है, वे व्यवस्था परीवर्तन को महत्वपुर्ण मानते है, उनका मानना है की सिर्फ राजनैतिक परीवर्तन ही नहीं हमे सामाजिक और आर्थिक आधार पर भी बदलाव चाहीए।





जिग्नेश पर आंदोलन चलाने के जुर्म मे अब तक कुल 6 फर्जी मुकद्दमे चल रहे है।

केवल पर सामाजिक प्रवृति करने के जुर्म मे अब तक कुल 3 फर्जी मुकद्दमे चल रहे है।





गुजरात चुनाव को लेकर जिग्नेश का मानना है की, भाजपा को कैसे भी करके हराना है, क्योंकी वह संविधान विरोधी और जन विरोधी है।

गुजरात चुनाव को लेकर केवल का मानना है की, कोंग्रेस और भाजपा दोनो को हराना है, क्योंकी दोनो पार्टी जातिवाद और मुडीवाद को बढावा देती है।



खैर, जो भी हो दोनो हमारे समाज के होनहार और क्रांतिकारी योद्धा है।


हम चाहते है की दोनो अपने जिवन मै आगे बढे और हमारे समाज व देश को एक नई दिशा दे।


हम कामना करते है की, जिग्नेश यह चुनाव जितकर एक विधायक के तौर पर समाज की सेवा करे और केवल जन आंदोलन के माध्यम से एक सामाजिक कार्यकर्ता की हैसियत से वंचित समुदाय की सेवा करे।


गुजरात के वंचित समुदाय के लोगो का सही प्रतिनिधित्व कर रहे यह दोनो युवाँओ पर आज पुरे समाज को गर्व है।



आपका मिशनसाथी

- सागर बाबरीया