भीमाकोरेगांव एक शौर्य गाथा

- December 30, 2017
शौर्य गाथा


 भीमा नदी के तट पर बसे पुना के कोरेगांव की कहानी..!!

01 जनवरी 1818 के ठंड का दिन था और दो सेनाएं आमने - सामने,

28000 ब्राह्मण सैनिकों सहित पेशवा बाजीराव-2  के विरुद्ध बाॅम्बे नेटिव लाइट इन्फेंट्री के 500 वीर महार सैनिक,






ब्राह्मण राज बचाने की फिराक में पेशवा तथा दूसरी ओर पेशवाओं के पशुवत अत्याचारों से बदला चुकाने की फिराक में गुस्से से तमतमाए महार,

और घमासान युद्ध, जिसमें तथाकथित ब्रह्मा के मुख से पैदा हुए पेशवा ब्राह्मणों की शर्मनाक पराजय,

सब से पहले उन 500 बहादुर महार सैनिकों को नमन करो।

क्योंकी . .



●  उस हार के बाद भारत से पेशवाई खतम हो गयी थी।

●  अछुतों को पेशवाओं की अमानवीय गुलामी से आजादी मिली।

●  अंग्रेजो को इस भारत देश की सत्ता मिली।

●  शुद्रो और महिलाओं का शोषण करने वाले मनुस्मृति के अमानवीय कानुन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।







●  अंग्रेजो ने भारत में शिक्षा का प्रचार किया, सभी लोगों को शिक्षा का अधिकार दिया जो हजारो सालों से वंचित समुदायों के लिए बंद था।

●  पेशवाओं के राज मे गुलामी की जिंदगी बसर करने वाले वंचित समुदायों को अंग्रेजो ने गांवो में अपनी खेती करने के लिए जमीन के अधिकार दिए।

●  अंग्रेजो ने जातिगत भेदभाव खतम किया और सभी जाति के लोगों को उनकी काबीलियत के हिसाब से सरकारी नौकरी में स्थान दिया।

●  भारत के वंचित समुदायों को संपत्ति इक्कठ्ठी करने का अधिकार मिला जो, मनुस्मृति के हिसाब से वर्जित था।

●  राष्ट्रपिता महात्मा फुले पढ पाए और इस देश की जातीवादी व्यवस्था को समज पाए।





●  अगर महात्मा फुले न पढ पाते तो छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधी व उनका इतिहास कौन ढुँढ पाता?

●  अगर महात्मा फुले न पढ पाते तो सावित्री बाई कभी इस देश की प्रथम महिला शिक्षिका न बन पाती।

●  अगर सावित्री बाई न पढ पाई होती तो, शायद इस देश की महिला कभी न पढ पाती।

●  छत्रपति शाहू महाराज पिछडों को आरक्षण कभी न दे पाते।

●  राष्ट्र निर्माता डाॅ. बाबासाहब आंबेडकर कभी न पढ पाते।

●  अगर बाबासाहब न पढे होते तो हमारे देश के 85% बहुजनो को आज जो संवैधानिक अधिकार मिले हुए है, वह शायद न मिले होते।







●  अगर देश के 85% बहुजनो को उनका संवैधानिक हक्क नहीं मिलता तो, वे आज जानवर से भी बदतर जिंदगी जिने को मजबुर होते।

अगर 1 जनवरी 1818 को 500 महार सैनिकों ने 28000 ब्राह्मण पेशवाओं को मार डाला न होता तो..

आज वंचित समुदाय के करोडो लोग कहां पे होते..?

Article By

-  केवलसिंह राठोड