सरकार और विपक्ष दोनो नहीं चाहते की पाटीदारो को आरक्षण मिले..!!

- November 06, 2017
गुजरात मे पिछले दो साल से पाटीदार लोगो ने जातिगत आरक्षण के लिए कई आंदोलन व प्रदर्शन किए है। 'सरदार पटेल गृप' और 'पाटीदार अनामत आंदोलन समिति' यह दो सामाजिक संगठन पाटीदार समाज के आरक्षण के लिए लड रहे है।

पाटीदार लोग असल मै कुर्मी जाति से संबंधित है, देश मे जब 'अन्य पिछडे वर्ग' की यादी तैयार हुई तो गुजरात को छोडकर पुरे भारत के पाटीदार यानी कुर्मीयों को OBC केटेगरी मै रखा गया।

वैसे देखा जाए तो पाटीदार यानी कुर्मी जाति के लोग हिंदु वर्णव्यवस्था के अनुसार शुद्र यानी चौथे दरज्जे के हिंदु है, धार्मिक पुस्तको के मुताबिक उनको जनैऊ धारण करना या अन्य धार्मिक क्रियाकांड करना वर्जित है।

गुजरात के पाटीदार लोग शुद्र होते हुए भी उनको सवर्ण केटेगरी मै रखकर तत्कालिन कोंग्रेस सरकार ने उनको अपने संवैधानिक अधिकारो से वंचित रखा और इसी वजह से गाँवो मे रहने वाले पाटीदार जाति से संबंधित गरीब और पिछडे लोगो का कोई विकास नहीं हुआ।

गुजरात प्रदेश मै पाटीदारो की कुल 13 पेटा जातियाँ है पर मुख्य दो पेटा जाति है, एक कडवा पटेल और दुसरी लेउआ पटेल, उसमै भी कडवा पटेल जाति के लोग बाकी पेटा जाति के लोगो के मुकाबले शिक्षा व संपत्ति के मामले मै ज्यादा संपन्न है।

पिछले कुछ सालो से गुजरात के युवा आंदोलनकारी व पाटीदार समाज के शोषित लोग SPG और PASS के नेतृत्व मे अपने हक्क व अधिकार की लडाई लडने को रास्तो पर निकले और जबरदस्त आंदोलन खडा किया।

पाटीदार समाज की मांग है की उनको OBC का दर्जा मिले और पाटीदार जाति से संबंधित जरुरतमंद व गरीब लोगो को उनका संवैधानिक हक्क मिले।

वैसे देखा जाए तो गुजरात मै पाटीदारो की आबादी 75 लाख के करीब है, भाजपा और कोंग्रेस के लिए यह सबसे बडी वोटबेंक है। गुजरात के पाटीदार अगर संगठीत हो और चाहे तो कोई भी सरकार बना भी सकते है और गिरा भी सकते है, इसी लिए सरकार और विपक्ष दोनो उनको खुश रखने का पुरा दिखावा करता है।

लेकिन अंदर की बात यह है की, सरकार और विपक्ष दोनो नहीं चाहते की पाटीदार समाज को उनका संवैधानिक अधिकार मिले।

गुजरात मै पाटीदारो ने जब आंदोलन चलाया तब प्रदेश और केन्द्र दोनो मै भाजपा की सरकार थी फिर भी RSS प्रेरीत भाजपा ने पाटीदारो को उनके संवैधानिक अधिकार देने से मना कर दिया और 49% से ज्यादा आरक्षण न देने का सुप्रिम कोर्ट के जजमेन्ट का बहाना बनाया।
वैसे दैखा जाए तो सुप्रिम कोर्ट के जजमेन्ट के बावजुद भी आंध्रप्रदेश और तेलंगाणा मै कुल 82% आरक्षण है, तमिलनाडु मै 69% आरक्षण है और भी कई राज्यो मै 49% से ज्यादा आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था है।

तो यह कैसे मुमकिन हुवा ?

संविधान के शेड्युल्ड-9 मै देश के अहम् जमीन से संबंधित कानुन के साथ-साथ आरक्षण संबंधित भी यह सारी व्यवस्थाए है, भारतीय संविधान के यह कानुनो को बदलना बहोत मुश्किल है क्योंकी यह "स्पेशियल मेजोरीटी विथ स्टेट" होने पर ही सुधारा या बदला जा सकता है।

संविधान के मुताबिक हमारा देश मे संसंदिय प्रणाली को प्राधान्य दिया गया है और संसद जो चाहे कानुन बना सकती है और उसे लागु भी करवा सकती है।

भारतीय संसद मे बनाए गये कानुन को हमारा सुप्रिम कोर्ट गैरसंवैधानिक बताकर उनको रद्द कर सकती है पर संविधान के दायरे मै रहकर बनाए गए कानुन को कोई भी कोर्ट रोक नहीं सकती।

सरकार अगर गुजरात के 75 लाख पाटीदारो को न्याय दिलाना चाहे तो उन्हे लोकसभा और राज्यसभा मे 'सिम्पल मेजोरीटी' से संविधान के अनुच्छेद-16 मे सुधार करके पाटीदार आरक्षण संबंधित व्यवस्थाओ को संवैधानिक करार दे सकती है और OBC क्वोटा को 27% से बढाकर उनकी आबादी के हिसाब से 54% तक कर सकती है।

लेकिन सच तो यह है की, सरकार और विपक्ष दोनो नहीं चाहते की पिछडी जाति से संबंधित पाटीदारो को उनका संवैधानिक अधिकार मिले।

सरकार मै बैठी RSS की टीम-A भाजपा ने तो पाटीदारो को न्याय नहीं दिया लेकिन विपक्ष मे बैठी  RSS की टीम-B कोंग्रेस ने भी पाटीदार जाति से संबंधित जरुरतमंद और गरीब लोगो की आवाज संसद मै उठाना उचित नहीं समजा।

गुजरात विधानसभा चुनाव नजदिक आते ही भाजपा और कोंग्रेस के नेताओ ने पाटीदारो को आरक्षण के मुद्दे पर चुनावी लोलीपोप देना चालु कर दिया, भाजपा और कोंग्रेस दोनो अपने चुनावी धोषणापत्र मै पाटीदार आरक्षण का मुद्दा छापकर पाटीदारो के वोट मुफ्त मै बटौरेगी और आंदोलनकारीयों को मुर्ख बनाएगी।
भाजपा चाहे तो एक हप्ते मै पाटीदारो को उनका संवैधानिक हक्क दे सकती है, क्योंकी राज्यसभा और लोकसभा दोनो मै उनका और उनके साथी पक्षो का पुर्ण बहुमत है। सडक से लेकर संसद तक जिनका इतना जबरदस्त विरोध हुवा वो GST का बिल 'स्पेशियल मेजोरीटी विथ स्टेट' होने के बावजुद इतनी आसानी से पारीत कर सकती है तो पाटीदार आरक्षण संबंधित संवैधानिक सुधार तो 'सिमप्ल मेजोरोटी' से पारीत करना है, यह तो बिल्कुल आसान है।

लेकीन RSS प्रेरीत भाजपा सरकार नहीं चाहती की, पाटीदारो को उनका संवैधानिक अधिकार मिले।

कोंग्रेस बता रही है की, हम अगर 2019 मै देश की सत्ता पर आए तो पाटीदारो को आरक्षण देंगे। कोंग्रेस की वर्तमान स्थिति देखी जाए तो वे अपने लास्ट स्टेज मै है यानी की मृतप्राय है और अगर एक बार सोच ले की गलती से भी कोंग्रेस ने 2019 का लोकसभा चुनाव जित लिया तो राज्यसभा मै बहुमत कैसे लाओए ?  फिर, कहेंगें की हम पाटीदारो को आरक्षण देना तो चाहते है पर हमारे पास बहुमत नहीं है।

इसी बहाने कोंग्रेस भी पाटीदारो को बेवकुफ बना रही है।

अब देखना यह है की, गुजरात के 75 लाख पाटीदार कौनसा स्टेन्ड लेते है ?

PASS के कन्वीनर हार्दिक पटेल कहते है की वे पाटीदारो के प्रतिनिधि है और SPG के कन्वीनर लालजी पटेल कहते है की वे पाटीदारो के प्रतिनिधि है। पर सवाल यह है की, गुजरात के 75 लाख पाटीदार जाति के लोग यह दोनो को अपना सच्चा प्रतिनिधि मानते है क्या ?

गुजरात का चुनाव जितने के लिए भाजपा और कोंग्रेस दोनो एडी-चौटी का जोर लगा रहै है और पाटीदार जाति से संबंधिक कई आंदोलनकारीयों को पैसे व टिकट का लालच देखकर खरीद-फरौत कर रहे है।

जो भी हो पाटीदारो को यह बात तो माननी ही होगी की, सरकार मे बैठी भाजपा और विपक्ष मे बैठी कोंग्रेस दोनो उनके लिए खतरनाक है।

गुजरात के चुनाव मे अगर 75 लाख पाटीदार एकजुट नहीं हुए तो पिछले चुनावो के तरह इसबार भी RSS प्रेरीत भाजपा और कोंग्रेस दोनो उनका 'टुल्स' की तरह उपयोग करेंगें और फिर फेंक देंगें।

अब देखना यह है की, गुजरात के पाटीदार लोग को उनके संवैधानिक हक्क व अधिकार की लडाई मे सफल होंगे या नहीं ?


आपका मिशनसाथी
- केवलसिंह राठौड



जय भारत