We The People Of India Wants Judicial Revolution ..

- January 05, 2017

दोस्तो,

दुनिया के सभी लोकतंत्र मुख्य तीन पिल्लर पर आधारित होते है.
1) विधायिका
2) कार्यपालिका
3) न्यायपालिका

भारत भी एक लोकतांत्रिक गणतंत्र देश है, जहाँ तक भारतीय न्यायपालिका के बारे मे बात करे तो संविधान के मुताबिक वे विधायिका एवं कार्यपालिका से संपुर्ण रुप से स्वतंत्र काम करती है.

लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है की, RTI के माध्यम से मिली जानकारी के मुताबिक देशभर मे सेसन्स एवं डिस्ट्रीक्ट कोर्टो मे कुल मिलाकर 3,00,000,00 (तीन करोड) से भी ज्यादा केस पेन्डींग है, अलग-अलग राज्यो की सभी हाईकोर्टो मे लाखो केस पेन्डींग है और तो और हमारे देश के सुप्रीम कोर्ट मे भी हज्जारो केस अभी भी पेन्डींग है, जो की बहोत गंभीर समस्या है.

हमारे देश के अलग-अलग राज्यो के सभी हाईकोर्टो मे 45% से भी ज्यादा जजो समेत अन्य स्टाफ की वेकेन्सी खाली है, और यही हाल सेसन्स एवं डिस्ट्रीक्ट कोर्टो का भी है.

हमारे यहाँ जब लोगो के केस बोर्ड पर आते है तब उसमें से ज्यादातर लोगो की तो मौत हो चुकी होती है, और इसी वजह से खुन एवं ब्लात्कार जैसे गंभीर अपराध के आरोपी भी क्राइम करने के बाद भी बिन्दास्त घुमते है.

लेकिन फिर भी हमारी केन्द्र सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट ज्युडिश्यल मिसमेनेजमेन्ट को ठीक करने के बजाय ये बात के लिए लड रहै है की जजो की अपोइन्मेन्ट कौन करेगा, सरकार या कोर्ट ?

डिजिटल इंडिया के नाम पर देश विदेश मे अपनी कामयाबी का ढिंढोरा पिटने वाले हमारे माननीय प्रधानमंत्री, इस बात पर भी कृपया ध्यान दे की डिजिटल कोर्ट तो ना सहि बल्कि अभी भी ज़्यादातर कोर्टो मे युज होने वाले पुराने ज़माने के टाइपरायटर की जगह
कम से कम कम्प्यूटर तो लगवाइए ताकी कोर्ट का समय बचे.

हम चाहते है की न्यायपालिका मे सुधार होने चाहिए, कोर्ट मे काम करने वाले स्टाफ का ओफिस टाइम बढाना चाहिए, जजो की अपोइन्मेन्ट के वख्त उनकी कास्ट नहि ब्लकि उनकी क्वालिफ़िकेशन देखी जानी चाहिए और न्यायपालिका मे बडे पैमाने पे हो रहे भष्ट्राचार पर तुरंत रोक लगे.

आप की क्या राय है ?




आपका मिशनसाथी
- केवलसिंह राठोड