ब्राह्मण बिना किये ही मौज मे, तो फिर क्यों जाये फौज में ?

- December 03, 2016

जहाँ सचिवालय एवं सभी बड़ी पोस्टों पर ब्राह्मण 90% प्रतिशत भरे पड़े हैं लेकिन एक ऐसी जगह है जहां पर ब्राह्मणों की संख्या बहुत कम है और वह जगह है सेना,यदि RTI के तहत जानकारी प्राप्त की जाए तो हकीकत सामने आ जायेगी कि बेवकूफ बनाकर लूटने वाले लोग मंदिरों में तो 100 प्रतिशत हैं, लेकिन सेना में 2 प्रतिशत भी नहीं हैं, क्योंकि सेना में आरती से बात नहीं बनती है वहाँ तो क्रांति करनी पड़ती है तथा वहाँ यज्ञ में मुफ्त के घी की आहुति नहीं देनी है बल्कि वहाँ तो स्वयं के प्राणों की आहुति देनी होती है,वहाँ शुभ,अशुभ व मंगल से बात नहीं बनेगी बल्कि सेना में तो जंगल और दंगल में मुकाबला करना होगा,वहाँ चोटी बढ़ा कर घूमते रहेंगे तो दुश्मन शरीर की बोटी बोटी कर देगें, वहाँ मंतर के बोलों की जगह तोप के गोलों से मुकाबला करना पड़ेगा,बीस वर्ष के युवा की मृत्यु पर शौक की घड़ी में भी हल्वा पुड़ी खाने की आदत छोड़ कर वहाँ कई दिनों तक भूखा रहना होगा।
किसी ने बिलकुल सच ही कहा है कि ब्राह्मण इतना बेवकूफ नहीं है कि सेना में जाकर लड़ाई के मैदान में अपना खून बहायेगा या घूट घूट कर जीयेगा, बल्कि वह तो मंदिरों में बैठ कर हमारा खून पीयेगा और ठाठ से जीयेगा।




Long Live Ambedkarism..
Down With Brahmanism...

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