गुजरात मे अनुसूचित जाति के लोगो पर हो रहे अत्याचार पे प्रशाशन की लापरवाही, पुलिस एफआरआई तक दर्ज नहि करती..

- December 04, 2016
गुजरात के उना मे हुये अमानवीय अत्याचार के ठीक कुछ दिनो पहले फ़रवरी २०१६ मे ब्राह्मणवादी मानसिकता वाले आरएसएस के कुछ गुंडो ने उना तहसिल के मोठा गाँव मे स्थित बौद्धविहार को ध्वस्त करके पुष्यमित्र श्रृंग का इतिहास दोहराया था.


महान बौद्धविहार को गिराने वाले गुंडो के ख़िलाफ़ एफआरआई दर्ज कराने को सामाजिक एकता एवं जागृति मिशन के युवाओं के साथ कई लोग उना पुलिस स्टेशन गये, लेकिन मनुवादी मानसिकता से ग्रस्त गुज़रात पुलिस ने अनुसूचित जाति के लोगों की एफआरआई दर्ज करने से मना कर दिया और उन्हें अपमानित कीया.

उसके बाद सामाजिक एकता एवं जागृति मिशन के संयोजक और हमारे युवा कार्यकर्ता केवलसिंह राठौड़ ने पुलिस स्टेशन मे उपस्थित अधिकारियों को अपनी औक़ात शिखाइ और कहा की ओफीशियल एफआरआई दर्ज करना उनकी क़ानूनन ड्युटी है.

केवलसिंह राठौड़ के कहने पर उना पुलिस स्टेशन के अधिकारी एफआरआई दर्ज करने को मजबूरन तैयार हुवे और शिकायत दर्ज की.

गुजरात समेत भारत भर मे एसे कई पुलिस स्टेशन है जहाँ पर पुलिस ओफीसर ग़रीब या पिछड़े लोगों की एफआरआई दर्ज नहि करते जिनकी वजह से गुंडों को हिंमत मिलती है और अत्याचार मे बढ़ोतरी होती है.

भारतीय दंड संहिता के अनुसार पुलिस ओफीसर द्वारा एफआरआई दर्ज न करने पर उनको छे महीने की कस्टडी और दंड की सज़ा हो सकती है, लेकीन बेकवर्ड एरिया मे लोगों को ये सारी चीज़ें पता नहीं होती जिनका गैरफायदा उना पुलिस स्टेशन के इन अधिकारियों जैसे जातिवादी पुलिसवाले उठाते है.

हम चाहते है का केन्द्र एवं सभी राज्यों के गृह विभाग को इसके बारे मे कड़क कार्यवाही करनी चाहिये जिससे सही मानने मे वेलफ़ेयर स्टेट का स्वप्न साकार हो सके ।


  • विपुल सरवैया उना